अरज सुण नवलख आज्यो जी !सिंह थांरां बेग सजाज्यो जी

 

अरज सुण नवलख आज्यो जी !
सिंह थांरां बेग सजाज्यो जी !!टेर!!

देणी नव निद्धि दरश,
हरसिद्धि हिंगळाज !
आखाँ कीरत ऊजळी,
लाखाँ राखण लाज !!1!!

साता दीप सिधावज्यो,
माता अरजी मान !
आता ज्यों खड़ आवज्यो,
ताता केहर ताण !!2!!

बावड़ ध्यायां बीदगां,
आवड़ कर आपाण !
कावऴ नैं सावड़ करण,
नावड़ बिरद निभाण !!3!!

नांणी नेड़ी निरख स्यूं,
खाँणी अरियाँ खेल !
तूझ समाणी मात तू,
बाणी करो उबेल !!4!!

किनियाणी वदती कळा,
ढाणी शत्रुवा ढूल !
सिंह पिलाणी सामरथ,
ताणी हाथ त्रिशूल !!5!!

साची माँ सुमरो शिवा,
काची करो न कोल !
जाची आज्यो जोगणी,
आछी छेछी होल !!6!!

बामी चाडन सुण बह्रै,
नामी चाडन नाम !
सामी देखे सेवगां,
काम्ही पूरण काम !!7!!

चाळक चढ़ आ चारणी,
जाळक रिमां जरूर,
प्रतपाळक पातां तणी,
कालक टाळ करूर !!8!!

माढैची सोंधै महिप,
पाड़ैची खळ पंथ !
काढेची दुख कविजणां
दाड़ेची रिम दन्त !!9!!

धिन धिननी आखे धरा,
जग जननी जमवाय !
गज गमनी सुणजै गिरा,
गिर रमनी गिरराय !!10!!

पग बन्दू कर-कर प्रणम,
दन्दू मेटण दाप !
करण आनन्दू कविकुळां,
आओ चन्दू आप !!11!!

बाखाणी कीरत बसू,
साणी बेग सिधाव !
जाणी नँहं पुळ जेजरी !
आणी हो तो आव !!12!!

कमलादे आणंद करो,
सुख सिन्धु हरसाल !
मंदै आखर मेट दे,
बंदै सेवक बाल !!13!!

 

!!चिरजा बालाबक्सजी पालावत !!

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