बिन बोल्या अम्बे कैसे कहूँ खिड़ियाणी म्हारे मन री आश

भगवती प्रकाश बाईसा महाराज की चिरजा

   !! टेर !!

बिन बोल्या अम्बे कैसे कहूँ खिड़ियाणी म्हारे मन री आश

     !! अंतरा !!

अवर न कोई देव री आवे,उर में छवि आभास,
ध्यान चरण थारां रो धरकर रसना रटत प्रकाश,
बिन बोल्या अम्बे कैसे कहूँ खिड़ियाणी म्हारे मन री आश

चरणा रो मैं शरणो चावूं,अर करलयो निज दास,
आफत मांहि पेले हेले, पावु थाने पास,
बिन बोल्या अम्बे कैसे कहूँ खिड़ियाणी म्हारे मन री आश

शर्म घणी आवे सुरराई,माँगत शरणों खास,
भगत घनेरा थारे भेळा, कीकर आवूं रास,
बिन बोल्या अम्बे कैसे कहूँ खिड़ियाणी म्हारे मन री आश

आज आबरू वाळी आफत,मेटो अम्ब प्रकाश
अवगुण भूल विराज हित आवो रख मोटो विस्वास,
बिन बोल्या अम्बे कैसे कहूँ खिड़ियाणी म्हारे मन री आश

कुंवर विराज शेखावत
तारानगर(चुरू
हाल- जयपुर

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