म्हाने राखलयो अन्नदाता थारे पास,प्रकाश मात थारा चरणा रे

फागण चिरजा अन्नदाता प्रकाश बाईसा महाराज री
!!स्थाई!!
म्हाने राखलयो अन्नदाता थारे पास,
प्रकाश मात थारा चरणा रे
चरणा रे अम्बे जी शरणा रे….

        !!अंतरा!!

पास रहां तो मैं अन्नदाता दरस रात दिन कर लेवां
देखां थाने जोत करंता और माँ करणी री सेवा
और सुणल्या श्री मुख स्यु माँ अमृत सा झरणा
म्हाने राखल्यो अन्नदाता थारे पास
प्रकाश मात थारा चरणा रे……

अन्नदाता रे नेड़े आया,उरमे आनँद आ जावे,
भूले वो भव रा दुख सगळा,सुख रो पार नही पावे,
और भूल ज्यावै जग वाला झूठा डर स्यु डरणा
म्हाने राखळयो अन्नदाता थारे पास
प्रकाश मात थारा चरणा रे……

मुखड़ा री मुस्कान मावड़ी,हिवड़ा मांहि बसगी सा,
माथा तिलक कियोड़ी मायड़,सूरत मन में रचगी सा,
तिरशूल लीयेड़ा हाथ किया दरशण सपणा
म्हाने राखलयो अन्नदाता थारे पास
प्रकाश मात थारा चरणा रे……

छोटो सो मैं भगत आपरो,थे मोटा मायड़ म्हारा,
खोटो हूं पण थारो बेटो,बिसराओ अवगुण सारा,
पुराओ दास विराज रा काज सुनलयो सुरराई आ करुणा
म्हाने राखलयो अन्नदाता थारे पास
प्रकाश मात थारा चरणा रे….

जय हो आवड़ करणी इंद्र प्रकाश मात की।।
श्री देशाण खुड़द धाम की जय।।
श्री करणी सुखधाम की जय।।

@विराज शेखावत

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